₹100 से कम में अपनी लाइफस्टाइल को Eco-Friendly कैसे बनाएं?
क्या आप भी अपनी ज़िंदगी को Eco-Friendly बनाना चाहते हैं, पर सोचते हैं कि यह बहुत महंगा है?
आपको लगता होगा कि पर्यावरण बचाना केवल अमीर लोगों का काम है, जिनके पास महंगे ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स खरीदने के पैसे हैं।
यह सच नहीं है!
वास्तव में, सस्टेनेबिलिटी का मतलब है कम खरीदना, कम फेंकना और स्मार्ट तरीके से चीजों का उपयोग करना।
भारत में, हमारी पुरानी आदतें (जैसे चीज़ों को दोबारा इस्तेमाल करना) ही सबसे अच्छी Eco-Friendly आदतें हैं! यहाँ हम 5 ऐसे आसान और सस्ते तरीके बता रहे हैं, जो ₹100 से भी कम में आपकी लाइफस्टाइल को ‘जीरो-वेस्ट’ बना सकते हैं और आपको ट्रेंडिंग सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के करीब ले जा सकते हैं।
1. प्लास्टिक टूथब्रश को कहें ‘ना’ (The ₹30 Bamboo Swap)
- बड़ी दिक्कत: दुनिया में हर साल खरबों प्लास्टिक टूथब्रश कूड़े में जाते हैं, जिन्हें सड़ने में सैकड़ों साल लगते हैं।
- आसान समाधान: अपने अगले प्लास्टिक टूथब्रश की जगह बाँस (Bamboo) का टूथब्रश खरीदें।
- कैसे मदद करेगा: बाँस प्राकृतिक रूप से biodegradable (सड़ने वाला) होता है। जब ब्रश खराब हो जाए, तो आप उसे मिट्टी में दबा सकते हैं।
- कीमत: आजकल अच्छे बैम्बू टूथब्रश बाज़ार या ऑनलाइन स्टोर पर ₹30 से ₹70 में मिल जाते हैं।
2. किचन का हीरो: कपड़े का नैपकिन (Ditch Paper Towels)
- बड़ी दिक्कत: एक रोल पेपर टॉवल (कागज़ के नैपकिन) की कीमत लगभग ₹80 से ₹150 होती है, और यह एक बार इस्तेमाल होने के बाद कचरा बन जाता है।
- आसान समाधान: पुराने सूती कपड़ों (जैसे फटी हुई टी-शर्ट या साड़ी) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर बार-बार इस्तेमाल होने वाले नैपकिन बना लें।
- कैसे मदद करेगा: आप इन कपड़ों का उपयोग रसोई में कुछ भी साफ करने के लिए कर सकते हैं, और गन्दा होने पर धोकर दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं।
- कीमत: ₹0! (पैसे की बचत, कचरे की बचत!)
3. शैम्पू की प्लास्टिक बोतल हटाओ (The Soap Bar Switch)
- बड़ी दिक्कत: शैम्पू, कंडीशनर और बॉडी वॉश की प्लास्टिक की बोतलें हर महीने कचरे में जाती हैं।
- आसान समाधान: तरल (Liquid) शैम्पू और बॉडी वॉश की जगह शैम्पू बार और साबुन का इस्तेमाल करना शुरू करें।
- कैसे मदद करेगा: ये बार्स या साबुन आमतौर पर कागज़ या कार्डबोर्ड में पैक होते हैं, जिससे प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह खत्म हो जाता है।
- कीमत: एक अच्छा शैम्पू बार ₹80 से ₹150 तक आता है, लेकिन एक रेगुलर साबुन ₹40 से कम में मिल जाता है, जो प्लास्टिक बोतल से सस्ता पड़ता है।
4. पानी की बोतल नहीं, अपना ‘ग्लास’ साथ रखें (The Carry Your Own Cutlery Hack)
- बड़ी दिक्कत: जब आप बाहर जूस या शेक पीते हैं, तो आपको प्लास्टिक का गिलास और स्ट्रॉ मिलता है, जो तुरंत कचरा बन जाता है।
- आसान समाधान: एक छोटा स्टील का फोल्डिंग स्ट्रॉ या एक छोटा स्टील का गिलास अपने बैग में रखें।
- कैसे मदद करेगा: जूस/चाय वाले से कहें कि वह आपका ड्रिंक आपके गिलास में दे। इससे एक प्लास्टिक का डिस्पोजेबल आइटम कम होगा।
- कीमत: एक अच्छा स्टील का स्ट्रॉ या एक छोटा गिलास ₹50 से ₹100 के बीच आसानी से मिल जाता है। यह एक बार का निवेश है।
5, खाद बनाओ, मिट्टी बचाओ (Composting with a Matka)
- बड़ी दिक्कत: आपके घर का लगभग 40% कचरा किचन से निकलता है, जो ज़मीन में जाकर मीथेन गैस पैदा करता है।
- आसान समाधान: अपने घर में एक छोटा मिट्टी का मटका (Matka) रखें। इसमें फल और सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती आदि डालते रहें।
- कैसे मदद करेगा: किचन का कचरा मटके में खाद बन जाएगा, जिसे आप अपने छोटे से बगीचे (या गमलों) में इस्तेमाल कर सकते हैं।
- कीमत: एक छोटा मिट्टी का मटका लगभग ₹50 से ₹80 में मिल जाता है।
निष्कर्ष: छोटी शुरुआत, बड़ा असर
जीरो-वेस्ट लाइफस्टाइल महंगी नहीं है; यह केवल पुरानी आदतों को बदलने के बारे में है। अगली बार जब आप बाज़ार जाएं, तो याद रखें: एक छोटे बाँस के टूथब्रश से लेकर अपनी पानी की बोतल ले जाने तक—आपका हर छोटा कदम पर्यावरण को बचाने में मदद करता है।
इनमें से कौन सा हैक आप आज ही शुरू करने वाले हैं? हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं!