सम्मान पारंपरिक ज्ञान का: छत्तीसगढ़ में शुरू हुई ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना’
छत्तीसगढ़, भारत पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा के ज्ञान को संजोने वाले जनजातीय समुदाय के बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप, राज्य में ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना’ शुरू कर दी गई है। यह योजना न केवल इन पारंपरिक ज्ञान के धारकों को सम्मान देगी, बल्कि उनके अमूल्य ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में भी मदद करेगी।
क्या है ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना’?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों के गाँवों में पारंपरिक रूप से वनौषधीय चिकित्सा संबंधी कार्य करने वाले बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के ज्ञान को संरक्षित करना और उन्हें प्रोत्साहित करना है।
किसे मिलेगा सम्मान?
- अनुसूचित जनजाति वर्ग के वे पुरुष, स्त्री और तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हों।
- जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ हो।
कितनी राशि मिलेगी?
- पात्र व्यक्तियों को प्रतिवर्ष ₹5,000/- (पाँच हज़ार रुपये) की सम्मान सह-प्रोत्साहन निधि प्रदान की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
जनजातीय समुदाय के पास प्रकृति और वनौषधियों का सदियों पुराना, अनमोल ज्ञान है, जो आधुनिक चिकित्सा से परे है। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ जैसे लोग इस ज्ञान की जीवित कड़ियाँ हैं।
“जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना हमारा संकल्प है।”
यह योजना इस संकल्प को ज़मीन पर उतारती है। ₹5,000 की सम्मान राशि इन ज्ञानवान व्यक्तियों के आर्थिक संबल को बढ़ाएगी और उन्हें अपने पारंपरिक कार्यों को जारी रखने के लिए प्रेरित करेगी। यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में मान्यता दी जा सकती है और उसे संरक्षित किया जा सकता है।
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