दशहरा 2025: रावण दहन का शुभ मुहूर्त और विजयदशमी का महत्व
दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव के समापन का प्रतीक है। यह दिन न केवल भगवान राम की रावण पर विजय को दर्शाता है, बल्कि देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की भी याद दिलाता है। दशहरा बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है।
दशहरा 2025: तिथि और रावण दहन का शुभ मुहूर्त
इस साल, दशहरा का पर्व मंगलवार, 8 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
रावण दहन का शुभ मुहूर्त:
- प्रदोष काल (शुभ समय): शाम 05:40 PM से शाम 06:15 PM तक।
इस शुभ मुहूर्त में रावण दहन करने से जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
Read Also:- शिक्षक दिवस 2025: इतिहास, महत्व और डॉ. राधाकृष्णन जी का जीवन
विजयदशमी का महत्व
दशहरे के दो प्रमुख पहलू हैं, जो इसे इतना खास बनाते हैं:
- भगवान राम की विजय: दशहरा का सबसे प्रसिद्ध पहलू भगवान राम की बुराई के प्रतीक रावण पर विजय है।
- मां दुर्गा की विजय: नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसे परास्त किया। इसी कारण इसे विजयदशमी कहा जाता है।
यह दिन हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और धर्म की होती है।
Want to Get Heavy Discount On Shopping – Click here
दशहरा मनाने की परंपराएँ
पूरे भारत में दशहरा को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन कुछ परंपराएं एक जैसी हैं:
- पुतला दहन: शाम को खुले मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों को जलाया जाता है। यह बुराई का प्रतीक है।
- शस्त्र पूजा: कई जगहों पर इस दिन शस्त्रों (औजारों और हथियारों) की पूजा की जाती है, क्योंकि यह शक्ति और सफलता का प्रतीक है।
- जलेबी का प्रसाद: उत्तर भारत में, रावण दहन के बाद जलेबी खाना एक पुरानी परंपरा है।
- मेले और झाँकियाँ: इस दिन पूरे देश में जगह-जगह मेले लगते हैं और भगवान राम के जीवन की झाँकियाँ निकाली जाती हैं।
निष्कर्ष
दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है जो हमें जीवन में हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलने का हौसला देती है।