छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के लिए ‘सहायक वाचन’ फिर लागू!
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूली शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य सरकार ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के पाठ्यक्रम में ‘सहायक वाचन’ को फिर से लागू करने का फैसला लिया है। यह पहल बच्चों को न सिर्फ़ किताबी ज्ञान देगी, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास से भी जोड़ेगी।
क्या है ‘सहायक वाचन’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
‘सहायक वाचन’ एक ऐसी पहल है जिसमें बच्चों को पारंपरिक पाठ्यक्रम के अलावा, भारत और छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं, पर्वों, रीति-रिवाजों और महान हस्तियों के जीवन से संबंधित जानकारी पढ़ने को मिलेगी।
विभाग का मानना है कि बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे देश-प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के बारे में बुनियादी जानकारी नहीं रखते।
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- उद्देश्य: छात्रों को अपने प्रदेश की गौरवशाली विरासत, नदियों, पर्वों, खनिज संपदा और पर्यटन स्थलों से परिचित कराना।
- शामिल विषय: छत्तीसगढ़ और भारत का इतिहास, संस्कृति, परंपराएं, नदियाँ, और महान विभूतियों की जीवन गाथाएं।
- लक्ष्य समूह: कक्षा तीसरी से आठवीं तक के छात्र।
नए सत्र से कौन-कौन सी किताबें होंगी लागू?
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिया है कि कक्षा चौथी, पांचवी, सातवीं और आठवीं के लिए नए पाठ्यक्रम के अनुरूप नई किताबें लागू की जाएंगी।
कक्षा पहली और दूसरी के छात्रों के लिए गणित और भाषा को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, जिसके लिए बारहखड़ी का उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम खास तौर पर कक्षा दूसरी और तीसरी के बच्चों में भाषा कौशल की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है।
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